12 करोड़ वनवासी समाज को समर्पित होगी श्रीमद् भागवत कथा
12 नवंबर को श्रीराम चौक से रमन वाटिका तक निकलेगी कलश यात्रा
आगरा। अंत्योदय मिलन शाखा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कमला नगर की ओर से देश के 12 करोड़ वनवासियों को समर्पित श्रीम द् भागवत कथा का आयोजन 12 नवंबर से किया जा रहा है। जिसमें कथा व्यास आचार्य पं.सुनील कृष्ण पाठक होंगे। आयोजन समिति द्वारा सद्भावना पार्क में बताया कि कलश यात्रा 12 नवंबर को सुबह 8.30 बजे श्रीराम चौक से प्रारंभ होगी। विभिन्न मार्गों से होती हुई कथा स्थल रमन वाटिका पहुंचेगी। मार्ग में उसका स्थान-स्थान पर स्वागत किया जाएगा। उसके बाद भागवत व्यास द्वारा श्रीमद् भागवत का महत्व बताया जाएगा। 13 नवंबर को परीक्षित शुकदेव मिलन, 14 को समुद्र मंथन और अजामिल चरित्र, 15 को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 16 को गोवर्धन लीला, 17 को रुक्मिणी विवाह और महारास, 18 को सुदामा चरित्र और शुकदेव को मोक्ष के प्रसंग के बाद कथा का विश्राम होगा। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर दो बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा, लेकिन 18 नवंबर की कथा दोपहर एक बजे से प्रारंभ होगाी।
कथा के मुख्य यजमान मनोज अग्रवाल-सुनीता अग्रवाल (पर्यावरण संरक्षक) हैं। दैनिक यजमानों में अशोक अग्रवाल-लक्ष्मी अग्रवाल (स्टेट बैंक वाले), मुरारी प्रसाद अग्रवाल -मीरा अग्रवाल (एकता बिल्डर्स), बिजेंद्र कुमार अग्रवाल -शालिनी अग्रवाल (एसबी पायल) प्रमुख हैं। वनवासी कल्याण आश्रम की मंत्री अनुराधा भाटिया, अशोक अग्रवाल, श्रीभगवान अग्रवाल, जीतेन्द्र तिवारी, राजीव नागरानी, नवदीप अग्रवाल, सीए शशि अग्रवाल, अरुण गर्ग, विदित बंसल, सीमा अग्रवाल, डॉ. पंकज भाटिया एवं विजय गोयल और अन्य प्रमुख रूप से प्रेस वार्ता में मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि वनवासी समाज स्वतंत्रता के बाद भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और परियोजनाएं के अभाव तथा मुख्यधारा से दूरी के कारण सामाजिक रूप से पीछे रहा है। वहीं दूसरी ओर वनों और प्राकृतिक संसाधनों पर उनकी आजीविका निर्भर है। वन अधिकार अधिनियम जैसे कानूनों के तहत उन्हें उनके जल, जंगल और जमीन का मालिकाना हक दिलाना उनकी गरीबी दूर करने के लिए जरूरी है। यह वनवासी अक्सर बिचौलियों, अवैध खनन और बाहरी शोषण का शिकार होते हैं। सहायता और कानूनी सुरक्षा से इनका जीवन सुरक्षित होता है।
वनवासी समाज का जीवन प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ है और इनकी परंपराएं, भाषाएं तथा विशिष्ट संस्कृति भारतीय धरोहर का हिस्सा हैं। इनकी संस्कृति को बिना नुकसान पहुंचाए इनका विकास करना आवश्यक है। इस कथा का उद्देश्य वनवासी समाज का सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान करना है।

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