मारपीट-अश्लीलता की शिकार महिला को थाना नाई की मंडी से डीसीपी सिटी दफ्तर तक नहीं मिला न्याय
बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों की हो जांच व पीड़िता को मिले न्याय: एडवोकेट गुल चमन शेरवानी
आगरा। जहां एक और उच्च अधिकारी अपने दफ्तर में आने वाले पीड़ित फरियादियों की फरियाद जमीन पर बैठकर सुन रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जनपद में तैनात पुलिसकर्मी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं और पुलिस के नाम पर बदनुमा दाग लगाने का काम कर रहे हैं। ताजा मामला आगरा के डीसीपी सिटी कार्यालय का है जहां शाहगंज क्षेत्र के आजम पाड़ा निवासी महिला नाई की मंडी पुलिस द्वारा सुनवाई न किए जाने पर अपनी फरियाद लेकर डीसीपी सीटी कार्यालय पहुंची थी। जहां मौजूद महिला पुलिस कर्मियों ने महिला के साथ बदसलूकी की पीड़ित महिला रो पड़ी लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को रहम नहीं आया और मां बेटी को कार्यालय से बिना कार्रवाई के भगा दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आजम पाड़ा निवासी बेगम चांदनी उस्मानी की शादी वसीम उस्मानी निवासी तोप खाना, नाई की मंडी से हुई थी। पीड़ित महिला चांदनी उस्मानी का आरोप है कि उसके जेठ जावेद द्वारा उसके साथ गाली गलौज, मारपीट एवं अश्लील हरकत की गई उसके कपड़े फाड़ दिए गए और घर से निकाल दिया गया। पीड़ित महिला थाना नई की मंडी पहुंची वहां तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की गई। आरोप है कि पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की पीड़ित महिला का कहना है कि उसने एसीपी कोतवाली को भी प्रार्थना पत्र दिया है लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित महिला अपनी मां बेगम नगीना उस्मानी के साथ डीपी सिटी के कार्यालय पहुंची थी वहां मौजूद महिला पुरुष कर्मियों ने पीड़ित महिला व उसकी मां के साथ बदतमीजी की और बिना किसी कार्रवाई के पीड़ित महिला को भगा दिया। प्रत्यक्ष दर्शियों ने पीड़ित महिला को कार्यालय के बाहर रोते हुए देखा गया था। डीसीपी सिटी कार्यालय का मामला पीड़ित महिला द्वारा दिनांक 29 सितंबर 2026 दिन मंगलवार, दोपहर 10:30 बजे के करीब का बताया गया है।
वहीं इस मामले में राष्ट्रवादी संगठन वंदे मातरम यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजसेवी एडवोकेट गुल चमन शेरवानी का कहना है कि अधिकारी पीड़ित व्यक्ति की समस्याएं जमीन पर बैठकर सुन रहे हैं जिससे पुलिस का इकबाल बुलंद हो रहा है लोगों का विश्वास कानून पर और कानून के रखवालों पर खरा उतर रहा है, लेकिन कुछ पुलिसकर्मी अपनी हद पार कर देते हैं और आवेश में आकर महिलाओं के साथ बदसलूकी किया जाना उचित नहीं है। श्री शेरवानी ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि ऐसे पुलिसकर्मियों की जांच होनी चाहिए तथा तेज मिजाज वाले पुलिसकर्मियों को ऐसे स्थान पर नहीं रखना चाहिए जो की फरियादियों से बदसलूकी या तेज आवाज में बात करते हैं। पीड़ित महिला एवं पुरुषों के साथ इस तरह से पेश आना उचित नहीं है। उच्च अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।





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