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यूजीसी के खिलाफ आगरा में 12 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन: राजू पंडित

 यूजीसी के खिलाफ आगरा में 12 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन: राजू पंडित

-यूजीसी, आरक्षण व एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर जन सहयोग संगठन निकालेगा 'पैदल मार्च'


आगरा। यूजीसी, आरक्षण नीति और एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर ताजनगरी आगरा में एक बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। जन सहयोग संगठन द्वारा आगामी 12 अक्टूबर 2026 को एक विशाल पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया गया है। जनसंयोग संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि यह पैदल मार्च आगरा के ग्वालियर रोड स्थित रोहता चौराहे से प्रारंभ होकर जिला मुख्यालय (जिलाधिकारी कार्यालय) तक जाएगा। जन सहयोग संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा। जिला मुख्यालय पहुँचने के बाद प्रदर्शनकारियों द्वारा आगरा के जिलाधिकारी के माध्यम से देश के राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें इन नियमों व कानूनों में आवश्यक संशोधन करने की मांग उठाई जाएगी।

*रोहता चौराहे पर सुबह 10 बजे जुटने की अपील*

इस आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए जन सहयोग संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजू पंडित ने समाज के सभी वर्गों और विशेष रूप से सवर्ण समाज से इस पैदल मार्च में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे 12 अक्टूबर को सुबह 10:00 बजे भारी संख्या में अपने साथियों के साथ रोहता चौराहे पर एकत्रित हों।

*'वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखना है'*

राजू पंडित ने अपने संदेश में जोर देकर कहा कि सवर्ण समाज के लोगों को एकजुट होकर इस मार्च में शामिल होना चाहिए ताकि इस आंदोलन की गूंज और जनता की आवाज सीधे सरकार के कानों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित और न्यायसंगत बन सके। प्रशासन को भी इस पैदल मार्च और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संबंध में आवश्यक सूचना व व्यवस्थाओं के लिए अवगत कराया जा रहा है।

ज्ञातव्य रहे कि सर्वण समाज द्वारा देश भर में बड़े स्तर पर यूजीसी एवं आरक्षण के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि इस नियम के तहत सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को झूठे मामलों में फंसाने या प्रताड़ित करने का डर दिखाया जा रहा है, जिसे वे 'काले कानून' की संज्ञा दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह समानता के अधिकार के खिलाफ है और इससे सामान्य वर्ग के छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।

*सवर्ण समाज की प्रमुख मांगें:-*

1- यूजीसी रोलबैक : 2026 के यूजीसी जाति-समानता नियमों को पूरी तरह वापस लिया जाए।

2- सवर्ण आयोग का गठन: देश में सवर्णों के हितों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र 'सवर्ण आयोग' बनाया जाए।

3- आरक्षण नीति में सुधार: जातिगत आरक्षण को समाप्त कर आर्थिक आधार पर कोटा तय किया जाए, और 'एक परिवार, एक आरक्षण' का नियम लागू हो।

4- एससी/एसटी एक्ट में संशोधन: एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने के लिए इसमें आवश्यक संशोधन किए जाएं।

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