घूसखोर पंडत' नामक प्रस्तावित वेब सीरीज को लेकर आगरा में *अर्धनग्न प्रदर्शन,*
ब्रह्मांड समाज ने अर्धनग्न प्रदर्शन कर शंखनाद किया,
कहा कि फिल्म पर रोक नहीं लगी तो सड़कों पर उतर कर होगा उग्रप्रदर्शन,
जरूरत पड़ने पर डायरेक्टर ,अभिनेता और नेटफ्लिक्स को लेकर लेंगे कोर्ट की शरण,
*घूसखोर पंडित” फिल्म के विरोध में शंख ध्वनि एवं अर्धनग्न सांस्कृतिक चेतना का शांतिपूर्ण आयोजन*
आगरा। समाज की गरिमा,सांस्कृतिक अस्मिता और आत्मसम्मान की रक्षा के संकल्प के साथ आज परशुराम चौक, आवास विकास कॉलोनी,सिकंदरा में शंख ध्वनि द्वारा एक शांतिपूर्ण,गरिमामय एवं सांस्कृतिक चेतना कार्यक्रम आयोजित किया गया।यह आयोजन तथाकथित घूसखोर पंडित फिल्म में दिखाए गए उस अपमानजनक,एकांगी और नकारात्मक चित्रण के विरोध में था,जो एक पूरे सामाजिक वर्ग की गौरवशाली परंपरा, वैचारिक विरासत और ऐतिहासिक योगदान को ठेस पहुँचाता है।
कार्यक्रम के आयोजक डॉ.मदन मोहन शर्मा ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट और दो-टूक शब्दों में कहा यह विरोध किसी व्यक्ति,वर्ग या संस्था के विरुद्ध नहीं है। हमारा संघर्ष उस मानसिकता के विरुद्ध है,जो रचनात्मक अभिव्यक्ति की आड़ में किसी समुदाय की गरिमा को आहत करती है। जब संस्कृति पर आघात होता है, तो उसका उत्तर भी संस्कृति से—शांत, संयमित और गरिमामय ढंग से—दिया जाना चाहिए। शंख ध्वनि हमारी चेतना, आत्मसंयम और आत्मसम्मान का प्रतीक है।”
विकास भारद्वाज,पवन समाधिया,नकुल सारस्वत एवं विधायक शर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि समाज को विभाजित करने वाली सोच के विरुद्ध सांस्कृतिक एकता और चेतना ही सबसे सशक्त और प्रभावी उत्तर है। यह आयोजन उसी सामूहिक संकल्प की सशक्त अभिव्यक्ति है।
कार्यक्रम में विनीत सारस्वत,विधायक शर्मा,पवन समाधिया, सुनील सारस्वत, निक्की भगत,अवधेश शुक्ला,प्रवीण शर्मा,मयंक उपाध्याय, कशिश उपाध्याय, लंकेश,दीपक सारस्वत, सत्येंद्र भारद्वाज, विकास सारस्वत, आर्यन सारस्वत,नकुल सारस्वत,निशु पंडित सहित अनेक समाजसेवी, अभिभावक,बुद्धिजीवी एवं संस्कृति-प्रेमी नागरिक उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने धोती-कुर्ता धारण कर, अर्धनग्न अवस्था में शंखनाद के माध्यम से शांति, मर्यादा और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश दिया।
वक्ताओं ने एक स्वर में स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूर्णतः अहिंसक, संवैधानिक और सांस्कृतिक मर्यादाओं के अंतर्गत संचालित किया जाएगा तथा समाज के सम्मान की रक्षा हेतु संवाद, जन-जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना को ही प्रमुख माध्यम बनाया जाएगा।


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