google.com, pub-6037649116484233, DIRECT, f08c47fec0942fa0 जनकपुरी में शास्त्रोक्त विधि से संपन्न हुआ महारानी तुलसी व भगवान शालिग्राम का दिव्य विवाह

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जनकपुरी में शास्त्रोक्त विधि से संपन्न हुआ महारानी तुलसी व भगवान शालिग्राम का दिव्य विवाह

 जनकपुरी में शास्त्रोक्त विधि से संपन्न हुआ महारानी तुलसी व भगवान शालिग्राम का दिव्य विवाह



आचार्यगण वेद प्रकाश प्रचेता, किशोर कुमार लवानियां, राहुल रावत ने कन्यादान, सप्तपदी व मंगलाष्टक साथ पूर्ण कराया पाणिग्रहण संस्कार


आगरा। उत्तर भारत की प्रमुख, प्रसिद्ध और ऐतिहासिक रामलीला के अंतर्गत ताजनगरी आगरा की पावन धरा पर इस वर्ष 'श्री जनकपुरी महोत्सव 2026' बड़े ही हर्षोल्लास और वैदिक परंपरा के साथ मनाया जा रहा है। इस भव्य महोत्सव का सबसे पवित्र और अलौकिक क्षण रहा- महारानी तुलसी और भगवान शालिग्राम का पाणिग्रहण संस्कार। भावना स्टेट स्थित भुवनेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित इस दिव्य विवाह को पूर्णतः शास्त्र सम्मत पद्धति और भक्ति भाव के साथ संपन्न कराया गया। इस दिव्य अनुष्ठान को क्षेत्र के प्रख्यात विद्वान आचार्य वेद प्रकाश प्रचेता जी, आचार्य किशोर कुमार लवानियां जी एवं आचार्य राहुल रावत जी द्वारा संपूर्ण विधि-विधान के साथ पूर्ण कराया गया। तीनों आचार्यों के कुशल सानिध्य में वैदिक मंत्रों की गूंज, मंगल गीतों और भक्तों के गगनभेदी जयकारों के बीच विवाह के सभी मुख्य नियम जैसे कन्यादान, सप्तपदी (सात फेरे) और मंगलाष्टक विधिपूर्वक कराए गए। वैदिक आचार्यों ने स्पष्ट किया कि यह विवाह कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि पूर्ण वैदिक, परंपरागत और विधिवत पद्धति से संपन्न हुआ है।

*अखंड सौभाग्य और श्रीहरि की कृपा का आधार: आचार्य राहुल रावत*

अनुष्ठान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य राहुल रावत जी ने बताया कि सनातन धर्म में तुलसी-शालिग्राम विवाह का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिव्य विवाह को कराने और इसके दर्शन करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, अखंड सौभाग्य और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। वहीं कार्यक्रम में मौजूद विद्वान आचार्यों ने संयुक्त रूप से कहा कि आगरा की धरती पर हुआ यह भव्य आयोजन हमारी समृद्ध सनातन संस्कृति के जीवंत होने का एक अनुपम प्रमाण है।

सहयोगी उपाचार्यों और गणमान्य लोगों की रही गरिमामयी उपस्थिति

इस पावन अनुष्ठान को सफल बनाने में मुख्य आचार्यों के साथ उनके सहयोगी उपाचार्यों- पंडित अरुण कटरा, पंडित राघव शास्त्री, पंडित कुणाल शर्मा, पंडित हर्ष शर्मा एवं पंडित आयुष शर्मा ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान राजा जनक और रानी सुनैना के स्वरूप में सजे पात्रों सहित जनकपुरी महोत्सव समिति व रामलीला कमेटी के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्य लोग व श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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