टर्म इंश्योरेंस का गणित: निवेश नहीं, परिवार की आर्थिक सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच
अगर कोई रिटर्न नहीं मिलेगा, तो क्या यह घाटे का सौदा है? राजेश पंडित द्वारा जानिए बीमा और निवेश का असली अंतर
आगरा। आज के दौर में जब लोग फाइनेंशियल प्लानिंग (वित्तीय नियोजन) की बात करते हैं, तो अक्सर उनके मन में एक सवाल उठता है- 'अगर मैं 60-70 साल तक बिल्कुल स्वस्थ रहा, तो मेरे टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम का क्या होगा? मुझे वापस क्या मिलेगा? क्या मेरा पैसा डूब गया?' आमतौर पर भारतीय परिवारों की मानसिकता रही है कि जहाँ पैसा लगाया जाए, वहाँ बदले में रिटर्न बढ़ता हुआ दिखना चाहिए। लेकिन वित्तीय सलाहकारों के अनुसार, यहीं पर निवेश और सुरक्षा के बीच के बड़े अंतर को समझना बेहद ज़रूरी है।
*कार से समझिए जोखिम और सुरक्षा का सिद्धांत*
यदि आप ₹50 लाख की कार खरीदते हैं और हर साल ₹60-70 हजार का इंश्योरेंस प्रीमियम देते हैं, तो साल के अंत में कार सुरक्षित रहने पर कोई भी व्यक्ति इंश्योरेंस कंपनी से प्रीमियम वापस नहीं मांगता। बल्कि, लोग इस बात से खुश होते हैं कि कार सुरक्षित रही। ठीक यही नियम इंसानी जिंदगी पर भी लागू होता है। जिस कार की सुरक्षा के लिए हम हर साल प्रीमियम देने को तैयार हैं, क्या उस इंसान की आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रीमियम देना महंगा है, जिसकी कमाई पर पूरा परिवार निर्भर है? टर्म इंश्योरेंस कोई निवेश नहीं, बल्कि शुद्ध सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य पैसा बढ़ाना नहीं, बल्कि कमाने वाले की अनुपस्थिति में परिवार को आर्थिक सहारा देना है।
*₹20,000 का प्रीमियम बनाम ₹1 करोड़ की सुरक्षा*
शहर के प्रमुख वित्तीय विशेषज्ञ राजेश पंडित के अनुसार, एक मामूली वार्षिक प्रीमियम (जैसे ₹20,000) के बदले व्यक्ति को ₹1 करोड़ या उससे अधिक का लाइफ कवर मिल जाता है। इस गणित को दो संभावनाओं से समझा जा सकता है:
1- पहली संभावना: यदि आप लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीते हैं, तो यह सबसे बड़ी खुशी है। आपने परिवार के साथ वक्त बिताया और अन्य माध्यमों (म्यूचुअल फंड, पीपीएफ आदि) से संपत्ति बनाई।
2- दूसरी संभावना: यदि कोई अनहोनी हो जाती है, तो वही छोटा सा प्रीमियम आपके परिवार के बच्चों की पढ़ाई, होम लोन, और रोजमर्रा के खर्चों के लिए ₹1 करोड़ का मजबूत फाइनेंशियल बैकअप बन जाता है।
*विशेषज्ञ की सलाह: बीमा और निवेश को अलग रखें*
एक समझदार और संतुलित फाइनेंशियल प्लान में दोनों की भूमिका अलग होती है:
1- निवेश का उद्देश्य: धन का निर्माण करना (म्यूचुअल फंड, पीपीएफ, बैंक एफडी, रियल एस्टेट)।
2- बीमा का उद्देश्य: जोखिम के समय परिवार की रक्षा करना।
'इंश्योरेंस को इन्वेस्टमेंट मत समझिए और इन्वेस्टमेंट को इंश्योरेंस मत बनाइए।'
*असली घाटे का सौदा क्या है?*
प्रीमियम का वापस न मिलना नुकसान नहीं है, बल्कि असली नुकसान तब होता है जब परिवार का कमाने वाला व्यक्ति बिना किसी लाइफ कवर के दुनिया से चला जाए। ऐसे में पीछे छूटे परिवार को भावनात्मक दुख के साथ-साथ कर्ज, पढ़ाई और आर्थिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। अतः सही सवाल यह नहीं होना चाहिए कि 'अगर मैं जीवित रहा तो मुझे क्या मिलेगा?', बल्कि यह होना चाहिए कि 'अगर मैं नहीं रहा, तो मेरे परिवार का क्या होगा?' टर्म प्लान कोई खर्च नहीं, बल्कि अपने परिवार के प्रति एक जिम्मेदारी है। *-
राजेश पंडित (रिटायरमेंट एंड वेल्थ प्लानिंग कंसलटेंट)।*





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