लखनऊ कूच से पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता संजीव नागर 'संजू भैया' हाउस अरेस्ट
ओबीसी अधिकारों की लड़ाई दबाने का आरोप, कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी रोष
आगरा। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता संजीव नागर 'संजू भैया' को पुलिस प्रशासन द्वारा उनके आगरा स्थित निवास पर हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर लिया गया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अधिकारों और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर लखनऊ में आयोजित होने वाले विशाल विधानसभा व जनभवन घेराव प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रवाना होने वाले थे। पुलिस बल ने उनके आवास की घेराबंदी कर उन्हें लखनऊ जाने से पूरी तरह रोक दिया। इस दमनकारी कदम के बाद आगरा से लेकर लखनऊ तक का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। नजरबंदी की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता संजीव नागर 'संजू भैया' ने अपने बयान में कहा, 'वर्तमान सरकार सत्ता के बल पर विपक्ष को डराने की कोशिश कर रही है। मुझे चारदीवारी के भीतर और घर में जरूर रोका जा सकता है, लेकिन जनता के हक में उठने वाली मेरी आवाज और मेरे क्रांतिकारी विचारों को यह पुलिसिया तंत्र कभी नहीं रोक सकता।' उन्होंने साफ किया कि पिछड़ों, दलितों और शोषितों के हक की लड़ाई किसी भी सूरत में बंद नहीं होगी।
प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव नागर को हाउस अरेस्ट किए जाने की खबर जैसे ही स्थानीय कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को मिली, उनमें भारी रोष फैल गया। बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और नेताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर रोष व्यक्त किया। कांग्रेस पदाधिकारियों ने सरकार की इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि 'कांग्रेस पार्टी न तो इस तानाशाही के आगे कभी हार मानेगी और न ही अब रुकने वाली है।" नेताओं का आरोप है कि वर्तमान भाजपा सरकार विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है। जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों और ओबीसी समाज की मांगों से डरी हुई सरकार दमनकारी नीतियां अपना रही है, लेकिन कांग्रेस पार्टी हमेशा जनता की मुखर आवाज बनकर सड़कों पर संघर्ष करती रहेगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग द्वारा ओबीसी समाज की विभिन्न मांगों, जैसे आगामी जनगणना में ओबीसी का अलग कॉलम जोड़ने और उनकी आबादी के अनुपात में अधिकार सुनिश्चित करने को लेकर लखनऊ में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसके तहत पूरे प्रदेश से नेताओं की धरपकड़ और नजरबंदी की यह कार्रवाई सामने आई है।





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