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8वें वेतन आयोग में देरी: रेलवे कर्मचारी संघ ने की 30% अंतरिम राहत की मांग

 8वें वेतन आयोग में देरी: रेलवे कर्मचारी संघ ने की 30% अंतरिम राहत की मांग



बोनस गणना की 7,000 की सीमा पर जताई आपत्ति, न्यूनतम 18,000 करने की मांग


आगरा। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन और सिफारिशें लागू होने में हो रही देरी को देखते हुए रेलवे कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (यूएमआरकेएस) ने आगरा मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के माध्यम से प्रधानमंत्री और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। संघ ने बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत का हवाला देते हुए 1 जनवरी 2026 से कर्मचारियों के मूल वेतन और पेंशनभोगियों की मूल पेंशन पर 30 प्रतिशत अंतरिम राहत देने की पुरजोर मांग उठाई है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यूएमआरकेएस (संबद्ध बीआरएमएस एवं बीएमएस) ने रेलवे कर्मचारियों के उत्पादकता संबद्ध बोनस (पीएलबी) की गणना के लिए निर्धारित ₹7,000 प्रति माह की सीमा को विसंगतिपूर्ण बताते हुए इस पर गंभीर आपत्ति जताई है। संघ के नेताओं का तर्क है कि जब सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 प्रति माह है, तो बोनस की गणना ₹7,000 पर करना पूरी तरह अनुचित है। संघ ने मांग की है कि बोनस की गणना कम से कम ₹18,000 की सीमा पर की जाए और कर्मचारियों को बकाया अंतर राशि का भुगतान किया जाए।

इससे पूर्व, आगरा छावनी स्थित लोको पायलट एवं ट्रेन मैनेजर लॉबी प्रांगण में भारी संख्या में रेल कर्मचारी और संगठन के पदाधिकारी एकत्र हुए। इस अवसर पर मुख्य रूप से जोनल संयुक्त मंत्री बंशी बदन झा, मंडल अध्यक्ष हरि बल्लभ दीक्षित, मंडल मंत्री यू.एस. भारद्वाज, संगठन मंत्री राजेश शर्मा, उपाध्यक्ष आर.के. गौतम, एन.एल. सिंह, उदय सिंह मीणा, राहुल कुमार, सुरेंद्र गौतम, दिलीप कुमार दीक्षित, विशाल बाबू, एचडी सिंह, सुनील कुमार निर्मलकर, जेपी सिंह, शिव प्रकाश गुप्ता, केआर मीणा, राजीव कुमार, शुभम गर्ग, वाइपी सिंह, वेद प्रकाश, सतपाल कठेरिया, अरविंद चौहान सहित आदि कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे। संघ ने स्पष्ट किया है कि वे रेलकर्मियों के न्यायसंगत हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

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