धवल पोशाक में श्रीहरि और जगमगाते दीपों की श्रंखला से जगमगाया श्रीजगन्नाथ मंदिर
राधा रानी के प्रिय कार्तिक माह में प्रतिदिन दीपों से जगमगाएगा श्रीजगन्नाथ मंदिर, कार्तिक मास दीपदान महोत्सव के प्रथम दिन श्वेत पोशाक में भक्तों को दिए दर्शन
आगरा। राधारानी के प्रिय कार्तिक मास दीपदान महोत्सव का शुभारम्भ आज श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कान, कमला नगर) में भक्तिभाव के साथ किया गया। मंगला आरती, संकीर्तन पर 2100 दीपदान के साथ आज सम्पूर्ण मंदिर जगमगा रहा था। आज श्रीहरि ने बहन सुभद्रा व भाई बलराम संग धवल पोशाक में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।
प्रातः 4.30 बजे मंगला आरती के साथ आज कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर में कार्तिम मास दीपदान महोत्सव का शुभारम्भ हुआ। जिसमें भक्तों ने दामोदराष्टकम, दीपदान कर तुलसी मैया की आरती की। हरे रामा हरे कृष्णा... संकीर्तन और भगवान के अलौकिक दर्शन ने हर भक्त को भक्ति के सरोबर में डुबकी लगवाई। इस्कान आगरा के अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप ने बताया कि कार्तिक मास में प्रतिदिन दामोदराष्टम व गोपीगीत होगा। प्रतिदिन 2100 दीप मंदिर परिसर में प्रज्ज्लित कर दीपदान किया जाएगा। भगवान के विभिन्न वेश और गोपाष्टमी, बैकुण्ठ चतुर्दशी, दीपावली, देवउत्थान एकादशी सहति विभिन्न उत्सव भक्तिभाव के साथ मनाए जाएंगे। इस अवसर पर मुख्य रूप से इस अवसर पर नितेश अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, शैलेन्द्र अग्रवाल, कान्ता प्रसाद अग्रवाल, राजेश उपाध्याय, संजीव बंसल, शैलेश बंसल, ओमप्रकाश अग्रवाल, संजय कुकरैजा, राजेश मल्होत्रा, संजीव मित्तल, देव केशव, राजेश गर्ग, सुनील मनचंदा, अदिति गौरांगी आदि उपस्थित रहे।
श्रीकृष्ण से पहले राधा और मार्गशीष से पहले आता है कार्तिक माह
क्यों है कार्तिक माह का विशेष महत्व
आगरा। गीता के ग्याहरवें ध्याय में श्रीकृष्ण ने कहा है कि सभी माह में मार्गशीष का महीना मैं हूं। कृष्ण के नाम से पहले राधा का नाम और मार्गशीष माह से पहले कार्तिक माह आता है। इसलिए कार्तिक माह को राधारानी का माह माना जाता है, जो श्रीहरि को बहुत प्रिय है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण को बल देने के लिए राधा जी पहले आयी। इसलिए राधारानी को प्रसन्न करने के लिए कार्तिक माह में विशेष व्रत व पूजन किया जाता है। राधा जी से पहली बार श्रीकृष्ण कार्तिक माह में ही मिले थे, जब जन्मांध राधारानी को दृष्टि मिली थी। कार्तिक मास के व्रत को उज्ज्वला व्रत भी कहा जाता है।
पूरे माह होंगे यशोदा दामोदर के दर्शन
आगरा। त्रैता युग में दीपावली के दिन श्रीराम अयोध्या वापस आए थे, परन्तु द्वापर युग में दीपावली के दिन यशोदा माता ने भगवान को ओखल से बांध दिया था। यह ऐसी लीला है जिस कोई देख भी नहीं सका। भक्ति के कारण श्रीहरि माता से प्रेमवश बंधे थे। इसी भक्ति को नमन करने के लिए कार्तिक माह में प्रतिदिन यशोदा-दामोदर के दर्शन होते हैं। श्रीकृष्ण की सभी लीलाएं कार्तिक माह में हुई। गौचारण गिर्राज धरण, महारास, कालिया नाग मर्दन, इंद्र दमन, गोवर्धन पूजा, समुन्द्र मंथन सभी लीलाए कार्तिक मास में हुई। श्रीकृष्ण का जन्म भादों में परन्तु नामकरण कार्तिक माह में ही हुआ था।






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