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भारत–अमेरिका व्यापार समझौता : भारतीय उद्योग के लिए एक रणनीतिक उपलब्धि- पूरन डावर

आगरा। भारत–अमेरिका व्यापार समझौता ऐसा समझौता है, जिसका भारतीय उद्योग लंबे समय से इंतज़ार कर रहा था—विशेषकर यह जानने के लिए कि यह समझौता श्रम-प्रधान उद्योगों को वास्तविक लाभ देगा या केवल पूंजी-प्रधान क्षेत्रों तक सीमित रहेगा।


यह सर्वविदित है कि अमेरिका, विश्व की लगभग 3% आबादी के साथ वैश्विक क्रय-शक्ति का लगभग 24% नियंत्रित करता है। यह ऐसा बाज़ार है, जिसे भारत किसी भी स्थिति में नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता था। राष्ट्रपति ट्रम्प की रणनीति भी इसी आर्थिक शक्ति का लाभ उठाने पर केंद्रित रही है।


माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi के दूरदर्शी नेतृत्व तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal के सक्षम मार्गदर्शन में, वाणिज्य मंत्रालय, DPIIT और पूरी वार्ता टीम के अथक प्रयासों से भारत ने अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक अनुकूल और कम शुल्क वाला समझौता हासिल किया है।


हाल ही में भारत ने यूरोपीय संघ के साथ जिस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप दिया—जिसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है—उसका साक्षी बनने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ। उसी संदर्भ में भारत–अमेरिका समझौते को “फादर ऑफ ऑल डील्स” कहना अनुचित नहीं होगा, क्योंकि अमेरिकी बाज़ार का आकार और प्रभाव अत्यंत विशाल है।


हमें पूर्ण विश्वास है कि श्रम-प्रधान क्षेत्र जैसे फुटवियर एवं लेदर गुड्स, वस्त्र एवं परिधान, हस्तशिल्प, खिलौने तथा अन्य MSME आधारित उद्योगों में 3 से 5 गुना तक रोज़गार और निर्यात वृद्धि संभव होगी।


ये मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे और वर्तमान लगभग 7% की GDP वृद्धि दर को दोहरे अंकों की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


फुटवियर एवं लेदर उद्योग इस अवसर को लेकर अत्यंत उत्साहित है और अगले पाँच वर्षों में 5 गुना विकास के लक्ष्य के साथ वैश्विक बाज़ार में बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है।


उद्योग की ओर से हम माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी , वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल जी , विदेश मंत्री जयशंकर तथा भारत सरकार की पूरी टीम के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिनकी दूरदृष्टि और दृढ़ संकल्प से यह ऐतिहासिक उपलब्धि संभव हो पाई है।

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