आगरा में जूता उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठित उद्योगपति को उगाही और जान से मारने की धमकी
-न्यायालय ने दिए एफआईआर के आदेश, 50-50 मैसेज और 40 कॉल प्रतिदिन, मानसिक उत्पीड़न का भी आरोप
आगरा। जूता उद्योग से जुड़े एक प्रतिष्ठित उद्योगपति द्वारा कथित उगाही, फर्जी बकाया दिखाकर मानसिक उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी के आरोपों के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, आगरा ने थाना सिकंदरा को आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर विधि अनुसार विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। मामले के अनुसार, एचके-एचआर इंटरनेशनल एक्सपोर्ट पार्क के संचालक एवं वरिष्ठ समाजसेवी राजेश खुराना ने अधिवक्ता अनिल अग्रवाल के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र दायर किया। उन्होंने बताया कि उनकी फर्म अरतोनी स्थित एसके सेल्स कॉर्पोरेशन से जूतों का माल क्रय करती रही है। दोनों पक्षों के बीच चल रहे लेन-देन का समायोजन 31 मार्च 2020 को कर लिया गया था, जिसके बाद कोई भी बकाया राशि शेष नहीं रही।
पीड़ित का आरोप है कि इसके बावजूद फर्म के साझीदार - सौरभ जैन, सुरेंद्र कुमार जैन और अंशुल जैन ने कथित रूप से धन उगाही के उद्देश्य से एक मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया। इस नंबर से संस्था के कर्मचारियों को लगातार फोन कॉल और संदेश भेजकर भुगतान के लिए दबाव बनाया गया तथा धमकियां दी गईं। प्रार्थी के अनुसार, उनका लेन-देन आगरा की फर्म एसके इंटरप्राइजेज और एसके सेल्स कॉरपोरेशन से रहा था। संबंधित बकाया राशि 31 मार्च 2020 तक समायोजित कर समाप्त कर दी गई थी तथा आयकर अभिलेखों में भी इसका समुचित उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद आरोप है कि इन फर्मों के साझेदारों - सौरभ जैन, सुरेंद्र कुमार जैन एवं अंशुल जैन ने कथित रूप से एक वसूली संस्था सपोर्ट@क्रेडिटक.इन के माध्यम से दबाव बनाना शुरू किया। प्रार्थी ने आरोप लगाया कि 21 नवंबर 2025 को सुबह लगभग 11:02 बजे एक कॉल के दौरान उनसे कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और भुगतान न करने पर घर से उठवा लेने तथा जान से मारने की धमकी दी गई।
कानूनी नोटिस के बाद भी नहीं रुकी कार्रवाई
प्रार्थी ने 15 अक्टूबर 2025 को सभी आरोपित पक्षों को विधिक नोटिस भेजा, जो 16 से 18 अक्टूबर के बीच प्राप्त भी हुआ। बावजूद इसके, कथित कॉल और संदेशों का सिलसिला जारी रहा। प्रार्थी का दावा है कि इस निरंतर दबाव के कारण वह गंभीर मानसिक तनाव और माइग्रेन से पीड़ित हो गए हैं। प्रार्थी द्वारा थाना सिकंदरा, पुलिस आयुक्त आगरा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को डाक के माध्यम से शिकायत भेजी गई, परंतु मुकदमा दर्ज न होने पर उन्होंने अदालत की शरण ली। प्रार्थनापत्र में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत संज्ञेय अपराध का उल्लेख किया गया। आरोप है कि उचित स्तर पर सुनवाई न होने पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने थाना सिकंदरा को प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रकरण में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध परिलक्षित होता है और विवेचना कराए जाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है।
अदालत का आदेश
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मृत्युंजय श्रीवास्तव ने आदेश पारित करते हुए थाना सिकंदरा को निर्देशित किया कि प्रार्थनापत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित की जाए। यह आदेश कारोबारी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह कथित फर्जी वसूली और डिजिटल माध्यम से उत्पीड़न के मामलों में न्यायालय की सक्रियता को दर्शाता है। अदालत के इस निर्देश के बाद संबंधित पक्षों में हलचल है और अब पूरे प्रकरण की सच्चाई पुलिस विवेचना के बाद स्पष्ट होगी।


.jpeg)

0 टिप्पणियाँ