श्री मनः कामेश्वर रामलीला महोत्सव: अवध में गूंजे मंगलगान, गढ़ी ईश्वरा में घर-घर जन्मे रघुनंदन
श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव के द्वितीय दिवस रावण जन्म से लेकर अयोध्या में श्रीराम जन्म तक की लीला का मंचन, रामस्वरूप में सजे नन्हे बालकों को बांटे उपहार
आगरा। भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥
श्रीरामचरितमानस की इन मंगलकारी चौपाइयों के भाव के अनुरूप सोमवार को श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव के द्वितीय दिवस श्री मनःकामेश्वर ग्रामीण संस्थान, गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड पर अयोध्या का दृश्य साकार हो उठा। रावण जन्म से लेकर अयोध्या में प्रभु श्रीराम के जन्म तक की संपूर्ण लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। जैसे ही भगवान श्रीराम के प्राकट्य का प्रसंग आया, पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। बधाइयां बांटी गईं, मंगलगीत गाए गए और श्रद्धालुओं ने नृत्य कर प्रभु के जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं। वातावरण ऐसा भक्तिमय हुआ कि मानो गढ़ी ईश्वरा में ही अवधपुरी उतर आई हो।
श्रीराम जन्मोत्सव को विशेष बनाने के लिए क्षेत्र के विभिन्न परिवार अपने छोटे-छोटे बच्चों को श्रीराम के स्वरूप में सजाकर लेकर पहुंचे। पीतांबर धारण किए, मुकुट लगाए और हाथों में धनुष-बाण लिए नन्हे रामस्वरूप आकर्षण का केंद्र बने रहे। मठ प्रशासक हरिहर पुरी की ओर से सभी बच्चों को उपहार वितरित किए गए।
द्वितीय दिवस की लीला में सर्वप्रथम रावण जन्म का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। रावण के जन्म और उसके जीवन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से शक्ति, तपस्या, महत्वाकांक्षा और अहंकार के विभिन्न पक्षों को दर्शाया गया। इसके बाद अयोध्या में महाराज दशरथ के संतान प्राप्ति की कामना से किए गए यज्ञ, चारों राजकुमारों के जन्म और प्रभु श्रीराम के प्राकट्य का प्रसंग मंचित हुआ।
भगवान श्रीराम के जन्म की घोषणा होते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। मंगल ध्वनि, बधाइयों और जयकारों के बीच प्रभु के जन्मोत्सव की खुशियां मनाई गईं। महिलाओं ने पारंपरिक बधाई गीत गाए और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाई देकर आनंद साझा किया। रामजन्म का प्रसंग धर्म की स्थापना, अधर्म के अंत और मानवता के कल्याण के लिए ईश्वर के अवतरण का संदेश देता है।
रामजन्मोत्सव का सबसे मनोहारी दृश्य तब दिखाई दिया, जब क्षेत्र के परिवार अपने बच्चों को भगवान श्रीराम के स्वरूप में सजाकर लीला स्थल पर लेकर पहुंचे। नन्हे बच्चों के माथे पर तिलक, सिर पर मुकुट और पारंपरिक वेशभूषा ने वातावरण को राममय कर दिया। बच्चों को उपहार वितरित कर उनका उत्साह बढ़ाया गया।
श्री मनःकामेश्वर मठ मंदिर के श्री महंत योगेश पुरी ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव सनातन संस्कृति का अत्यंत पावन प्रसंग है। भगवान श्रीराम ने अपने जीवन से सत्य, धर्म, करुणा, कर्तव्य और मर्यादा का आदर्श प्रस्तुत किया। उनका चरित्र प्रत्येक युग में समाज को सही दिशा दिखाता है।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने कहा कि श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सहभागिता का भी उत्सव है। रामजन्म के अवसर पर पूरे क्षेत्र के परिवारों का बच्चों को रामस्वरूप में सजाकर लाना इस बात का प्रमाण है कि आज भी समाज में अपनी धार्मिक परंपराओं के प्रति गहरा लगाव है।





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