मथुरा/ 9 जून 2022 :सुपरस्पेशलिटी सर्वोदय हॉस्पिटल,सेक्टर -8 में मथुरा की एक 45 वर्षीय महिला का पूरी तरह से एक्टिव जॉइंट रिप्लेसमेंट रोबोट के ज़रिये घुटनों का रोबोटिक बाइलेटरल टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया | हॉस्पिटल के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सेंटर के एच.ओ.डी एवं डायरेक्टर डा. सुजॉय भट्टाचार्जी ने एक्टिव क्यूविस जॉइंट रोबोट सिस्टम का इस्तेमाल किया जिसमे विशेष रूप से विकसित सॉफ्टवेयर है जिससे एक ही सिटिंग में दोनों घुटनो की सर्जरी की जा सकती है |
गोवर्धन, मथुरा के महाविद्यालय की प्राचार्य पवन कुमारी ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण पिछले 7 वर्षों से दोनों घुटनों में दर्द और विकृति से पीड़ित थीं। उन्हें चलने में दर्द होता था और वह दिन-प्रतिदिन के काम करने के लिए संघर्ष करती थी। उनके इलाज ना करवाने की सूरत में उन्हें बिस्तर पर पड़ने और दैनिक दिनचर्या के काम करने में असमर्थ होने का खतरा था | मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉ.सुजॉय भट्टाचार्जी ने एक्टिव रोबोट सिस्टम का उपयोग करके दोनों घुटनों का रिप्लेसमेंट करने का निर्णय लिया।
सर्जरी की तैयारी में घुटनों का एक नॉन-कंट्रास्ट सीटी स्कैन किया गया और जरुरी बोन-कट और इम्प्लांट साइज पर फैसला किया गया। यह जानकारी वास्तविक सर्जरी से पहले रोबोट में डाली गई। सर्जरी के दौरान रोबोट द्वारा बड़ी सटीकता के साथ हड्डियों को काटा गया, जिससे गलती की संभावना कम हो गई। इस सर्जरी की खासियत यह थी कि सर्जरी रोबोट के द्वारा किए जाने पर भी डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी मरीज के घुटने के लिगामेंट (क्रूशिएट्स) को बनाए रखने में कामयाब रहे। सर्जरी के कुछ ही घंटों बाद पवन कुमारी अपने आप चलने में सक्षम हो गई थी। वह अब दर्द-मुक्त है और बिना किसी समस्या के दिन-प्रतिदिन के नियमित कार्य करने में सक्षम है।
"क्रूशिएट्स" दो क्रॉस-आकार के लिगामेंट होते है जो घुटने के सामने और पीछे की तरफ मौजूद होते हैं और जांघ की हड्डी को पिंडली की हड्डी से जोड़ते हैं। पारंपरिक रोबोट की सहायता से की जाने वाली सर्जरी में दोनो लिगामेंट्स को निकालना पड़ता है, जिसके कारण मरीज़ को कृत्रिम घुटने के बदले जाने जैसी एक अप्राकृतिक भावना के साथ रहना पड़ता है।
डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी, एच.ओ.डी एवं डायरेक्टर, रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सेंटर, सर्वोदय हॉस्पिटल, सेक्टर 8, फरीदाबाद का कहना है कि " कुल घुटने के रिप्लेसमेंट में एक या दोनों घुटने के लिगामेंट को संरक्षित करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह घुटने को एक प्राकृतिक एहसास देता है और स्थिर करने में मदद करता है। मरीजों को उनके ऑपरेटेड घुटने पूरी तरह से प्राकृतिक लगते हैं, जिससे वे भूल जाते हैं कि वे घुटने के रिप्लेसमेंट के साथ जी रहे हैं | यह एक अवधारणा है जिसे 'फॉरगॉटन नी' कहा जाता है। पारंपरिक रोबोटिक सर्जरी से किए गए नी रिप्लेसमेंट के साथ यह संभव नहीं है जो आज-कल मरीजों पर किया जाता है। हम दुनिया के पहले हॉस्पिटल हैं जिसने क्रूशिएट को बनाए रखते हुए टोटल रोबोटिक नी ट्रांसप्लांट करने की क्षमता विकसित की है।"
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